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जीवन में सच्चा त्याग तब दिखाई पडता है, जब विपत्ति के समय भी परहित करने का पूर्ण प्रयास किया जाये।

अरुण दुबे संवाददाता भरथना इटाव

उक्त बात सरस कथावाचक आचार्य अमित मिश्रा ने कस्बा के विधूना रोड स्थित शक्तिपीठ श्री बालरूप हनुमान जी महाराज हनुमान गढी (छोला मन्दिर) पर आयोजित 40वें मंगल महोत्सव के दौरान श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ समारोह में कथा का श्रवण कराते हुए कही

। उन्होंने कहा कि माता कुन्ती ने संसार कल्याण के लिए सम्पत्ति नहीं, बल्कि विपत्ति माँग ली। कुन्ती का त्याग वास्तव में सराहनीय है। जो परमात्मा से अपने लिए विपत्ति माँगकर संसार को सम्पत्तिवान करने का भाव रखती है। इस प्रकार जो जनकल्याण की भावना रखकर जीवन जीता है। वही त्याग कहलाता है। आचार्य श्री मिश्रा ने मौजूद महिला-पुरूषों को कथा सुनाते हुए कहा कि वस्तु के अभाव का त्याग, त्याग नहीं है। बल्कि वस्तु के रहते हुए उसका उपभोग न करना त्याग है।

इस मौके पर परीक्षित रविन्द्र सिंह राजावत, मन्दिर प्रबन्धक राजू चौहान, राजेश चौहान, संजीव श्रीवास्तव, डा0 अजय दुबे, दीपू दीक्षित, नीरज दुबे, पप्पू वर्मा, गजेन्द्र सिंह, रूद्रपाल सिंह भदौरिया, सनी श्रीवास्तव, बबलू दुबे, पंकज चौहान आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

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