Friday , March 1 2024

बिज़नेस

क्या स्पाइसजेट में होने वाली है 1,400 कर्मचारियों की छंटनी? एयरलाइन ने कही यह बात

नकदी संकट से जूझ रही बजट एयरलाइन स्पाइसजेट लागत में कटौती और निवेशकों की रुचि बनाए रखने के लिए 1,400 कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है। एयरलाइन में वर्तमान में 9,000 कर्मचारी हैं और यह लगभग 30 विमानों का संचालन करता है। इनमें से आठ विदेशी वाहकों से वेट-लीज पर लिए गए हैं, साथ ही चालक दल और पायलट भी इसके साथ हैं। स्पाइसजेट ने नौकरी में कटौती की पुष्टि की है।

एयरलाइन के एक प्रवक्ता ने कहा, “यह फैसला परिचालन आवश्यकताओं को देखते हुए कंपनी की लागत कम करने के लिए लिया गया है।” मामले की जानकारी रखने वाले एक शख्स ने कहा कि 60 करोड़ रुपये के सैलरी बिल को देखते हुए कर्मचारियों की संख्या में कटौती का जरूरी हो गया था।

एक अन्य शख्स ने छंटनी का जिक्र करते हुए बताया, “लोगों को पहले से ही कॉल आना शुरू हो गया है। स्पाइसजेट कई महीनों से वेतन भुगतान में देरी कर रही है। कई लोगों को अभी तक जनवरी का वेतन नहीं मिला है। स्पाइसजेट ने कहा है कि वह 2,200 करोड़ रुपये का फंड हासिल करने की प्रक्रिया में है। लेकिन जानकारों का मानना है कि कुछ निवेशकों ने इसमे दिलचस्पी नहीं दिखाई है।

हालांकि, एयरलाइन के प्रवक्ता ने कहा, “फंडिंग में कोई देरी नहीं हो रही है और हम अपने फंड इकट्ठा करने के मामले में अच्छी तरह से प्रगति कर रहे हैं और पहले ही अपनी सार्वजनिक घोषणाएं कर चुके हैं। “हम अगली किस्त के लिए अतिरिक्त घोषणाएं करेंगे। अधिकांश निवेशकों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई है।

कांग्रेस विधायक नारा भरत रेड्डी के परिसरों में ईडी का छापा, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय ने शनिवार को कर्नाटक के विभिन्न इलाकों में छापेमारी की। सूत्र ने बताया कि यह छापेमारी कांग्रेस विधायक नारा भरत रेड्डी और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले के तहत की गई है।

बेल्लारी के 34 वर्षीय विधायक के परिसरों और कर्नाटक एवं तेलंगाना के कई इलाकों में छापा मारा गया। केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों ने रेड्डी के बेल्लारी और बंगलूरू के परिसरों में छापेमारी की। रेड्डी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामला कर्नाटक पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर और भूमि सौदों के आरोपों से जुड़ा है। फिलहाल यह मामला ईडी की जांच के दायरे में हैं।

डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में आया उछाल, मौजूदा वित्तीय वर्ष में 15.60 लाख करोड़ रुपये हुए इकट्ठा

वित्तीय वर्ष 2024 में डायरेक्ट टैक्स (प्रत्यक्ष कर) कलेक्शन में 20 फीसदी का उछाल आया है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में यह 15.60 लाख करोड़ रुपये रहा, जो कि सरकार के पूरे वित्तीय वर्ष के संशोधित अनुमान का 80 फीसदी है।

सीबीडीटी ने एक बयान जारी कर बताया कि डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में मजबूत वृद्धि देखी जा रही है। डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 10 फरवरी 2024 तक 18.38 लाख करोड़ रुपये रहा, जो कि बीते साल के कलेक्शन से 17.30 फीसदी ज्यादा है।

डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन से नेट रिफंड को हटा दें तो ये 15.60 लाख करोड़ रुपये हैं, जो कि पिछले साल के नेट कलेक्शन से 20.25 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए ये कलेक्शन सरकार के डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन के संशोधित अनुमान का 80.23 फीसदी है।

1 अप्रैल 2023 से लेकर 10 फरवरी 2024 तक 2.77 लाख करोड़ रुपये रिफंड दिए गए हैं। सीबीडीटी ने बताया कि कॉरपोरेट इनकम टैक्स और पर्सनल इनकम टैक्स में भी वृद्धि हुई है। सीबीडीटी के अनुसार, कॉरपोरेट इनकम टैक्स में 9.16 प्रतिशत और पर्सनल इनकम टैक्स में 25.67 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिफंड को एडजस्ट करने के बाद यह वृद्धि क्रमशः 13.57 प्रतिशत और 26.91 प्रतिशत है।

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर; ऊर्जा मंत्री ने अक्षय ऊर्जा को लेकर किया बड़ा दावा

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार इस हफ्ते बढ़कर 622.469 अरब डॉलर हो गया है, जो बीते एक महीने का उच्चतम स्तर है। 2 फरवरी को खत्म हुए पिछले हफ्ते के मुकाबले ये 5.736 अरब डॉलर बढ़ा है। रिजर्व बैंक के साप्ताहिक डाटा के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा संपत्ति (Forex currency assets) का रहा, जो 5.186 अरब डॉलर बढ़कर 551.331 अरब डॉलर हो गया है।

विदेशी मुद्रा संपत्तियों में रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्राओं का उपयोग करके खरीदी गई यूएस ट्रेजरी बिल जैसी संपत्तियां हैं। विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा संपत्ति का ही होता है। गोल्ड रिजर्व भी 68 करोड़ डॉलर बढ़कर 48 अरब डॉलर हो गया है। अक्तूबर 2021 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सबसे ज्यादा 645 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचा था। हालांकि साल 2022 में आयात की लागत बढ़ने की वजह से विदेशी मुद्रा भंडार में काफी गिरावट आयी थी। अब एक बार फिर ये उच्चतम स्तर की तरफ बढता दिख रहा है।

2030 तक 65 फीसदी ऊर्जा, अक्षय ऊर्जा से हासिल करेंगे
केंद्रीय मंत्री आरके सिंह का कहना है कि साल 2030 तक हम अपनी कुल ऊर्जा जरूरत का 65 प्रतिशत अक्षय ऊर्जा से हासिल करने में सक्षम हो जाएंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अभी भारत की कुल ऊर्जा जरूरत में से 44 प्रतिशत ऊर्जा गैर-जीवाश्म ईंधन से हासिल होती है और साल 2030 तक इसके 65 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है। आरके सिंह ने कहा कि यह 2021 के कॉप सम्मेलन में तय किए गए लक्ष्य से कहीं ज्यादा है।

ग्लासगो में हुए कॉप26 सम्मेलन में भारत ने साल 2030 तक 500 गीगावाट ऊर्जा गैर-जीवाश्म ईंधन से पाने का लक्ष्य रखा था, जो भारत की कुल ऊर्जा जरूरत का 50 फीसदी है, लेकिन अब हम 60-65 प्रतिशत ऊर्जा अक्षय ऊर्जा से हासिल कर सकते हैं। इससे 2030 तक एक अरब टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा।

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रई आरके सिंह ने शुक्रवार को एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट वर्ल्ड सस्टेनेबल डेवलेपमेंट समिट के दौरान ये बात कही। उन्होने कहा 1,03,000 मेगावाट क्षमता की अक्षय ऊर्जा का अभी देश में निर्माण हो रहा है। वहीं 71 हजार मेगावाट के लिए बिड चल रही है।

मोबाइल फोन विनिर्माण क्षेत्र में पैदा होंगी 2.50 लाख नौकरियां, कंपनियों की उत्पादन क्षमता में आएगी तेजी

मोबाइल फोन विनिर्माण गतिविधियों में आ रही तेजी से अगले 12-18 महीने में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 2.50 लाख तक नौकरियों के उत्पन्न होने की उम्मीद है। सरकार की ओर से स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने और वैश्विक स्तर पर मोबाइल ग्राहकों के बढ़ने से यह संभव होगा। भारत में एपल के अनुबंध वाली तीन विनिर्माण कंपनियां फॉक्सकॉन, विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन के साथ भारतीय कंपनी डिक्सन टेक्नोलॉजी भी निर्माण क्षमता बढ़ा रही हैं। यह कंपनियां घरेलू और निर्यात की मांग को पूरा करने के लिए तेजी से काम कर रही हैं।

एपल चीन से अपनी विनिर्माण क्षमता को आक्रामक तरीके से भारत में स्थापित कर रही है। पिछले तीन वर्षों में भारत सरकार ने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत इस क्षेत्र में पांच लाख नौकरियां पैदा की है। विनिर्माण क्षमताओं का विस्तार करने व उपकरण निर्माताओं को लुभाने के लिए भारत ने 2025-26 तक 300 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक सामान उत्पादित करने का लक्ष्य रखा है।

12 अरब डॉलर मूल्य का आईफोन बनाएगी एपल
एपल 2023-24 में भारत में 12 अरब डॉलर मूल्य के आईफोन बनाने का लक्ष्य रखा है। यह उसके पूरी दुनिया में हो रहे निर्माण का लगभग 12% हिस्सा होगा। हाल में गूगल ने अपने पिक्सल स्मार्टफोन को भारत में बनाने की घोषणा की है। इससे भी बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

12 लाख लोगों को मिल रहा रोजगार…
एक अनुमान के मुताबिक, भारत में मोबाइल फोन विनिर्माण उद्योग में 12 लाख लोगों को इस समय रोजगार मिल रहा है। वित्त वर्ष 2026 तक इसके बढ़कर करीब 15 लाख तक होने की उम्मीद है। इसमें से एक तिमाही नौकरियां प्रत्यक्ष होंगी और बाकी अप्रत्यक्ष रूप से होंगी।

‘वे सत्ता में होते तो पता नहीं देश का क्या होता’, वित्त मंत्री ने लोकसभा में विपक्ष पर साधा निशाना

वित्त मंत्री ने शुक्रवार को लोकसभा में श्वेत पत्र बोलते हुए यूपीए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यूपीए राज में कोयला घोटाला हुआ। घोटाले से देश को नुकसान हुआ। हमने अपने कार्यकाल में कोयले को हीरे में बदल दिया। दुनिया में आज देश का सम्मान बढ़ा। यूपीए पर निशाना साधते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि अगर वे होते तो पता नहीं देश का क्या होता।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को संप्रग पर 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान आर्थिक कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस ने ‘पहले परिवार को पहले रखा’ रखा और अर्थव्यवस्था को ‘नाजुक पांच तक’ ले गई। ‘भारतीय अर्थव्यवस्था पर श्वेत पत्र और भारत के लोगों के जीवन पर इसके प्रभाव’ पर चर्चा की शुरुआत करते हुए सीतारमण ने कहा कि संप्रग सरकार के दौरान हुए राष्ट्रमंडल खेलों से देश का नाम खराब हुआ लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार के नेतृत्व में जी-20 की अध्यक्षता में भारत को वैश्विक स्तर पर सम्मान मिला।

विपक्षी सदस्यों तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय और एन के प्रेमचंद्रन ने श्वेत पत्र को खारिज करते हुए स्थानापन्न प्रस्ताव पेश किया। सीतारमण ने कहा कि मोदी सरकार ने ईमानदारी से काम किया और अर्थव्यवस्था को ‘नाजुक पांच देशों’ से बाहर निकाला और इसे विश्व की शीर्ष पांच श्रेणियों में भेजा। उन्होंने कहा कि अब भारत शीर्ष तीन वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की कगार पर है।

बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से बाजार में बढ़त; सेंसेक्स 167 अंक चढ़ा, निफ्टी 71750 के पार

घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को बड़ा उतार-चढ़ाव दिखा। बाजार के प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी सुस्त शुरुआत के बाद मजबूत हुए और बढ़त हासिल कर बंद हुए। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स 167 अंकों की बढ़त के साथ 71,595 के स्तर पर बंद हुए। वहीं, निफ्टी 64 अंक चढ़कर 21,782 पर पहुंच गया।

शुक्रवार के कारोबारी सेशन के दौरान बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में खरीदारी दिखी। इसके साथ ही एफएमसीजी और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयर भी हरे निशान पर कारोबार करते दिखे। ऑटो और मेटल सेक्टर के शेयरों में बिकवाली देखी गई। इससे पहले गुरुवार को सेंसेक्स 723 अंक नीचे फिसलकर 71,428 के स्तर पर बंद हुआ था।

उतार-चढ़ाव के बाद मजबूत हुआ बाजार, सेंसेक्स 300 अंक चढ़ा, निफ्टी 21850 के पार

मिले-जुले वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय बेंचमार्केट इंडेक्स हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मामूली बढ़त के साथ खुले, मुनाफा वसूली के कारण लाल निशान से नीचे लुढ़क गए। हालांकि खरीदारी लौटने से इंडेक्स फिर हरे निशान पर लौट आए। शुरुआती कारोबार के दौरान इफोसिस, टीसीएस और एचसीएल टेक के शेयरों में खरीदारी से बाजार को मजबूत मिली।

सुबह 10 बजकर 09 मिनट पर बीएसई सेंसेक्स 287.40 (0.40%) अंकों की बढ़त के साथ 72,018.82 के लेवल पर कारोबार करता दिखा। वहीं दूसरी ओर निफ्टी इस दौरान 82.55 (0.38%) अंकों की बढ़त के साथ 21,854.25 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। बीएसई सेंसेक्स के 30 शेयरों में पावर ग्रिड, एनटीपीसी, जेएसडब्ल्यू स्टील, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एक्सिस बैंक के शेयर गिरावट खुले, जबकि एचसीएल टेक, भारतीय एयरटेल, टीसीएस, अल्ट्राटेक सीमेंट और मारुति के शेयर मंगलवार को बढ़त के साथ खुले।

एकल शेयरों की बात करें तो जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयरों में 7% की गिरावट दर्ज की गई। सोमवार को कंपनी ने स्पष्ट किया था कि वह संकटग्रस्त वन 97 कम्युनिकेशंस के अधिग्रहण के लिए किसी भी बातचीत में शामिल नहीं है। तीसरी तिमाही के नतीजों के बाद बीएसई के शेयर 7% की गिरावट के साथ खुले। सेक्टरवार देखें तो मंगलवार को निफ्टी आईटी में 1.4% मजबूत हुआ जबकि निफ्टी ऑटो में 0.6% की बढ़त आई। वहीं, निफ्टी बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज, मेटल और रियल्टी सेक्टर के शेयर गिरावट के साथ खुले।

पेटीएम ने जियो फाइनेंशियल के साथ किसी भी डील से किया इनकार, रिपोर्ट्स को खारिज कर यह कहा

जियो फाइनेंशियल की ओर से पेटीएम वॉलेट के संभावित अधिग्रहण की अटकलों के बीच, पेटीएम ने इन दावों का खंडन किया है। कंपनी ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा है कि इस तरह के अधिग्रहण की बातें करने वाली खबरें काल्पनिक, आधारहीन और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। पेटीएम ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में कोई बातचीत नहीं हुई है। पेटीएम की ओर से यह स्पष्टीकरण उसकी सहयोगी कंपनी, पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड के लिए भी जारी किया गया है। विज्ञप्ति के अनुसार, पेटीएम पेमेंट्स बैंक ने मुकेश अंबानी के साथ अनुमानित अधिग्रहण से संबंधित कोई भी बातचीत नहीं हुई है।

जेएफएसएल ने पहले ही किया साफ- नहीं हो रही डील
पेटीएम ने कहा, “हम स्पष्ट करते हैं कि उपरोक्त समाचार काल्पनिक, आधारहीन और तथ्यात्मक रूप से गलत है। हम इस संबंध में किसी से बातचीत नहीं कर रहे हैं। हमारी सहयोगी कंपनी पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड ने भी हमें सूचित कर दिया है कि वे भी इस संबंध में किसी तरह की बातचीत नहीं कर रहे हैं।” यह स्पष्टीकरण अंबानी की जियो फाइनेंशियल सर्विसेज (जेएफएसएल) की ओर से यह साफ करने के एक दिन बाद आया है कि वह पेटीएम वॉलेट के अधिग्रहण के लिए संकटग्रस्त वन97 कम्युनिकेशंस के साथ कोई बातचीत नहीं कर रही है।

आरबीआई की सख्ती के बाद पेटीएम के शेयरों में आ चुकी है 43% तक की गिरावट
जेएफएसएल ने शेयर बाजारों को भेजी सूचना में कहा, “हम स्पष्ट करते हैं कि यह खबर काल्पनिक है और इस संबंध में हमारी कोई बातचीत नहीं हुई है।” स्टॉक एक्सचेंज बीएसई की ओर से कंपनी को उन रिपोर्टों पर टिप्पणी करने के लिए कहा गया था जिसमें कहा गया है कि जेएफएसएल पेटीएम के वॉलेट व्यवसाय के अधिग्रहण के लिए वन 97 के साथ बातचीत कर रही है। इस रिपोर्ट के बाद एनबीएफसी का शेयर बीएसई पर 14 फीसदी चढ़कर 289 रुपये पर बंद हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को पेटीएम पेमेंट्स बैंक को मार्च से अपने खातों या लोकप्रिय वॉलेट में ताजा जमा स्वीकार करना बंद करने के लिए कहा था, जिसके बाद से पेटीएम को लगभग 2.5 अरब डॉलर या उसके बाजार मूल्य का लगभग 43 प्रतिशत का नुकसान हुआ है।

पिछले साल फरवरी में हुई एमपीसी की बैठक में आखिरी बार किया गया था रेपो रेट में बदलाव
भारतीय रिजर्व बैंक की एमपीसी यानी मौद्रिक नीति समिति ने लगभग एक साल से रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। पिछली बार फरवरी 2023 में रेपो रेट को 6.25% से बढ़ाकर 6.5% किया गया था। तब से यह 6.5% पर स्थिर बना हुआ है। इस दौरान खुदरा महंगाई वर्ष 2023 के जुलाई महीने में 7.44% के उच्चस्तर पर थी और उसके बाद इसमें लगातार गिरावट आई। हालांकि, यह अब भी आरबीआई के टॉलरेंस बैंठ के ऊपरी छोड़ के करीब बना हुआ है। खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर, 2023 में 5.69% रही। सरकार ने देश के केंद्रीय बैंक आरबीआई को खुदरा महंगाई दर 2% से 6% के दायरे में रखने की जिम्मेदारी सौंपनी है।

एलन मस्क को झटका, टेस्ला से मिले 4.65 लाख करोड़ रु. के मुआवजा पैकेज को कोर्ट ने बताया ‘बहुत ज्यादा’

एलन मस्क को अमेरिका की डेलावेयर कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने 44 बिलियन पाउंड (GBP) की डील को रद्द करने का फैसला सुनाया है। मस्क की इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला ने 2018 में 55.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर (44 बिलियन पाउंड) का भुगतान सौदा किया था। टेस्ला की इस डील के खिलाफ शेयरधारक ने मुकदमा दायर कर दावा किया था कि कंपनी की तरफ से अधिक भुगतान किया गया है। न्यायाधीश कैथलीन मैककॉर्मिक ने डेलावेयर कोर्ट में अपने फैसले में कहा कि टेस्ला बोर्ड की तरफ से वेतन पैकेज को दी गई मंजूरी ‘त्रुटिपूर्ण’ है।

अदालत के फैसले से भड़के मस्क का बयान
फैसले के बाद मस्क ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म- एक्स पर लिखा कि कभी भी कंपनियों को डेलावेयर में कारोबार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि फैसला लेने के लिए अगर शेयरधारकों को प्राथमिकता दी जाएगी तो नेवादा या टेक्सास में कारोबार करना चाहिए। इसे लगभग 50 लाख लोग देख चुके हैं। उन्होंने एक्स पर एक पोल भी किया, जिसमें मस्क ने सवाल किया कि क्या टेस्ला को अपना मुख्यालय टेक्सास शिफ्ट कर लेना चाहिए। भारतीय समयानुसार बुधवार तड़के 6.10 बजे पूछे गए इस सवाल पर दो घंटे के भीतर 3.82 लाख लोगों ने वोट किया। 14 हजार से अधिक एक्स यूजर्स इसे लाइक कर चुके हैं, जबकि यह पोस्ट 30 लाख से अधिक लोगों ने देखी।

लगभग 4.65 लाख करोड़ रुपये का मुआवजा पैकेज ‘बहुत ज्यादा’
टेस्ला की इस डील से जुड़ी एक रिपोर्ट में बीबीसी ने बताया कि कॉरपोरेट इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा सौदा था। इस डील के बाद मस्क को दुनिया का सबसे अमीर शख्स बनने में काफी मदद मिली थी। डेलावेयर कोर्ट में लगभग एक सप्ताह चली सुनवाई के दौरान टेस्ला के निदेशकों ने बचाव में कई तर्क दिए, लेकिन डेलावेयर कोर्ट ने इन तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया। टेस्ला के मुताबिक डील इसलिए की गई थी क्योंकि दुनिया के शीर्ष उद्यमियों में शुमार मस्क एक कंपनी पर ध्यान केंद्रित करना चाहते थे। कोर्ट ने दलीलों को सुनने के बाद कहा कि टेस्ला की तरफ से दिया गया लगभग 4.65 लाख करोड़ रुपये का मुआवजा पैकेज ‘बहुत ज्यादा’ है।

शेयरधारकों के नजरिए से उचित नहीं अरबों का मुआवजा
डेलावेयर कोर्ट में मस्क की कंपनी- टेस्ला के वकीलों की दलीलों को खारिज करते हुए न्यायाधीश कैथलीन मैककॉर्मिक ने कहा, ‘कंपनी (टेस्ला) यह साबित करने में नाकाम रही कि शेयरधारक को डील की पूरी जानकारी थी।’ उन्होंने कहा कि टेस्ला की तरफ से इस डील में शामिल लोगों को पूरा अधिकार है, कंपनी इस बात को भी साबित नहीं कर सकी। बोस्टन कॉलेज लॉ स्कूल के प्रोफेसर ब्रायन क्विन के मुताबिक जज ने यह भी पाया कि टेस्ला का बोर्ड एलन मस्क के नियंत्रण में है, इसलिए 4 बिलियन पाउंड की इस तरह की डील को उचित ठहराना संभव नहीं है। 200 पन्नों के फैसले में न्यायाधीश ने मुआवजे की राशि को बहुत ज्यादा माना (compensation unfathomable sum) और कहा कि यह शेयरधारकों के नजरिए से उचित नहीं।

मस्क के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील का अवसर बाकी
टेस्ला के शेयरधारक रिचर्ज टॉर्नेटा के वकील ग्रेग वरालो ने 2018 में यह मुकदमा दायर किया था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने फैसले को अच्छा बताया। गौरतलब है कि इस फैसले के खिलाफ मस्क के पास डेलावेयर की सुप्रीम कोर्ट में अपील का मौका बाकी है।