Friday , July 12 2024

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बसपा के मैदान में उतरने से बदलेंगे दलों के समीकरण, भाजपा और सपा में टिकट को लेकर दौड़

मुरादाबाद:बसपा के उपचुनाव में उतरने से कुंदरकी विधानसभा सीट के भी समीकरण बदल जाएंगे। दूसरे दलों के सियासी खेल बिगड़ सकते हैं। ऐसे में उपचुनाव में कूदने से पहले राजनीतिक दलों ने नए सिरे से तैयारियों पर मंथन शुरू कर दिया है। कुंदरकी सीट पर बसपा को आखिरी बार 2007 में जीत मिली थी।

वर्ष 2022 में कुंदरकी विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर सपा विधायक बने जियाउर्रहमान बर्क को सपा ने लोकसभा चुनाव में संभल सीट से उम्मीदवार बनाया था। चुनाव में जीत दर्ज कर जियाउर्रहमान बर्क अब विधायक से सांसद बन गए। उनके विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद कुंदरकी विधानसभा सीट पर अब उपचुनाव होना है।

हालांकि अभी उपचुनाव को लेकर कोई कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक दलों ने तैयारी शुरू कर दी है। कुंदरकी विधानसभा सीट को लेकर भाजपा ने प्रभारी तैनात कर दिए हंैं। भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए दावेदारों ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक अपनी फील्डिंग सजानी शुरू कर दी है।

वहीं सपा से टिकट के लिए 12 से अधिक लोगों ने दावेदारी भी पेश कर दी है। भाजपा और सपा की तैयारियों के बीच बसपा के भी चुनाव मैदान में उतरने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। मंडल स्तर पर बसपा पदाधिकारियों ने बैठकें भी करनी शुरू कर दी हैं।
बसपा के चुनाव में उतरने के संते पर भाजपा और सपा में नए सिरे से सियासी मंथन शुरू हो गया है। वहीें बसपा दो बार कुंदरकी सीट पर जीत दर्ज कर चुकी है। पिछले चुनाव में बसपा तीसरे स्थान पर रही।
दावेदारों की नजर बसपा पर भी

भाजपा और सपा से टिकट के दावेदारों की नजर अब बसपा पर भी है। दोनों के दावेदारों ने अंदर खाने बसपा के बड़े नेताओं से भी संपर्क साधना शुरू कर दिया है। ताकि अपने दल से टिकट नहीं मिलने की स्थिति में बसपा का विकल्प आजमाया जा सके।
बसपा का दलित-मुस्लिम समीकरण बन सकता है दलों के लिए चुनौती

बसपा का दलित-मुस्लिम समीकरण दूसरे दलों के लिए चुनौती बन सकते हैं। बसपा इसकी समीकरण के दम पर कुंदरकी विधानसभा सीट पर दो बार जीत दर्ज कर चुकी है। बसपा के टिकट पर हाजी अकबर दो बार विधायक बने।
आठ जोन बनाकर बसपा ने सौंपी जिम्मेदारी

मंडलीय कार्यालय पर बृहस्पतिवार को बसपा की मंडल स्तरीय बैठक बुलाई गई, जिसमें कुंदरकी विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव की तैयारियों पर चर्चा की गई। उपचुनाव को जीतने की रणनीति बनाई गई है। साथ ही कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र को आठ जोन में बांटकर नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई।

स्कूल नौकरी घोटाले की जांच तेज, सीबीआई तलाश रही ओएमआर शीट, दो सर्वर और हार्ड डिस्क जब्त

सीबीआई ने पश्चिम बंगाल में स्कूल नौकरी घोटाले की जांच तेज कर दी है। शुक्रवार को सीबीआई ने एक कोलकाता की एक निजी कंपनी के परिसर में तलाशी अभियान चलाया। यहां से सीबीआई ने दो सर्वर और हार्ड डिस्क जब्त की।

सीबीआई अफसरों की टीम ने शहर के दक्षिणी एवेन्यू क्षेत्र स्थित मैसर्स एस बसु एंड रॉय कंपनी पर तलाशी के दौरान सर्वर और हार्ड डिस्क जब्त किए। सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि सर्वर और हार्ड डिस्क की जांच में भर्ती परीक्षा में प्रयोग की गई ओएमआर शीट के डिजिटल बैकअप को प्राथमिकता दी जाएगी। अफसरों ने बताया कि बैकअप खंगालने के लिए छह सीबीआई अफसर और दो साइबर क्राइम विशेषज्ञों की टीम बनाई गई है। जब्त किए गए सर्वर और हार्ड डिस्क में मौजूद डाटा को रीस्टोर करने के लिए फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी। अफसरों ने कहा कि ओएमआर शीट की डिजिटल कॉपी के बैकअप को रीस्टोर करने पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है।

पिछले सप्ताह कोलकाता हाईकोर्ट ने सीबीआई को शिक्षक पात्रता परीक्षा 2014 में प्रयोग हुईं ओएमआर शीट की डिजिटल जांच करने और नष्ट किए गए सर्वर, डिस्क और अन्य सुरक्षित डाटा को डिजिटली रूप से तलाश करने के लिए कहा था। कोर्ट ने सीबीआई को यह भी निर्देश दिया था कि कंप्यूटर, सर्वर और हार्ड डिस्क मैसर्स एस बसु राय एंड कंपनी के हैं या नहीं, इसकी जांच के लिए निजी विशेषज्ञों और निजी संस्थानों जैसे एनआईसी, विप्रो, टीसीएस, इन्फोसिस के विशेषज्ञों की मदद ली जाए। दरअसल एस बसु राय एंड कंपनी ने 2014 में पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ प्राइमरी एजुकेशन द्वारा कराई गई शिक्षक पात्रता परीक्षा में उपयोग की गई ओएमआर शीट को स्कैन किया था।

कोर्ट ने यह भी कहा था कि विशेषज्ञ संस्थाओं द्वारा की गई जांच में आने वाले खर्च की मांग सीबीआई को पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ प्राइमरी एजुकेशन से करनी होगी। मुकदमे की अगली सुनवाई 23 अगस्त को होगी।

उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने ईडी पर उठाया सवाल, कहा- राज्य में अनियमितताओं की जांच के लिए है एसआईटी

बंगलूरू:राज्य सरकार द्वारा संचालित निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं के लिए पहले से ही एसआईटी काम कर रही है। कर्नाटक उपमुख्यमंत्री ने इस बात का जिक्र करते हुए कहा कि एसआईटी के होते हुए ईडी को जांच करने की जरूरत नहीं है।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने शुक्रवार को कहा ईडी के जांच पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि राज्य में पहले से ही राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल काम कर रहा है। तो राज्य सरकार के संचालित निगम की कथित वित्तीय अनियमितताओं के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को जांच की कोई जरूरत नहीं है।

उप मुख्यमंत्री शिवकुमार राज्य कांग्रेस के प्रमुख भी हैं। हाल ही में कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड में अनियमितताओं से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत एजेंसी द्वारा पूर्व मंत्री बी नागेंद्र को हिरासत में लिए जाने पर उन्होंने कहा कि हम एसआईटी के माध्यम से जांच कर रहे हैं, ईडी जांच कोई जरूरत नहीं थी, लेकिन वे ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं इसके बारे में जानने की कोशिश करूंगा और फिर इस पर बोलूंगा।”

दरअसल, कथित अनियमितताओं के चलते नागेंद्र ने 6 जून को अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। वहीं पिछले दो दिनों में ईडी ने नागेंद्र और सत्तारूढ़ कांग्रेस विधायक बसनगौड़ा दद्दाल, जो निगम के अध्यक्ष भी हैं, उनसे जुड़े कई परिसरों पर तलाशी ली। सूत्रों की मानें तो एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया है। इसके तहत कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में करीब 20 स्थानों पर छापेमारी की।

वहीं मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा भूमि खोने वालों को कथित धोखाधड़ी से भूखंड आवंटित करने के मामले में मैसूर में भाजपा विरोध कर रही है। इस मामले में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी को दिए गए भूखंड शामिल हैं। इस मामले पर डीके शिवकुमार ने कहा, “मैसूर में, भाजपा राजनीति कर रहे हैं, उन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। जब समय आएगा, हम इसका जवाब देंगे।” उन्होंने दावा किया कि “कोई घोटाला नहीं हुआ है, जो कुछ भी हुआ है, वह भाजपा के कार्यकाल में हुआ है।

वहीं मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी गुरुवार को आरोपों से इनकार कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके खिलाफ़ नाराज़गी के कारण साजिश रची जा रही है क्योंकि वह पिछड़े वर्ग के समुदाय से हैं और दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने कहा कि वह भाजपा के ऐसे कदमों से नहीं डरेंगे। सिद्धारमैया के इस दावे पर एक सवाल का जवाब देते हुए कि उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह पिछड़े वर्ग से हैं। शिवकुमार ने कहा, “केवल एक बड़ा राज्य (कांग्रेस के साथ) है, इसलिए वे राज्य का मनोबल गिराना चाहते हैं, हम ऐसा नहीं होने देंगे।”

‘जो करेगा जाति की बात, उसे पड़ेगी कसकर लात’, गडकरी ने भाजपा नेताओं को चेताया; कहा- काम पर ध्यान दें

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता नितिन गडकरी ने जातिवाद की राजनीति को लेकर सख्त बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि जो भी देश में जाति की बात करेगा, वे उसे जमकर फटकार लगाएंगे। गडकरी ने यह भी कह दिया,‘जो करेगा जाति की बात, उसे पड़ेगी कसकर लात।’

‘जो गलती कांग्रेस ने की उसे ना दोहराएं’
गडकरी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने लगातार मतदाताओं का भरोसा जीता है। उन्होंने भाजपा नेताओं से यह भी कहा कि वो गलती न दोहराएं, जिस वजह से कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई है। गडकरी ने स्पष्ट रूप से कहा,‘अगर हम कांग्रेस की तरह काम करते रहेंगे तो कांग्रेस का सत्ता से बाहर जाने का कोई फायदा नहीं और हमारा सत्ता में आने का भी कोई फायदा नहीं है।’ आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के बहुमत हासिल न कर पाने को लेकर तरह-तरह की बातें कहीं जा रहीं थीं। गडकरी का यह बयान उन बयानों के संदर्भ में आया है।

गडकरी ने आडवाणी के कथन को याद किया
दरअसल, गडकरी गोवा के पणजी में भाजपा नेताओं की एक बैठठक को संबोधित कर रहे थे। इस बैठक में गोवा भाजपा अध्यक्ष सदानंद तनावड़े और मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत भी मौजूद थे। अपने 40 मिनट के संबोधन में गडकरी पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के ‘भाजपा अलग सोच वाली पार्टी है’ वाले बयान को भी याद किया। भाजपा नेता ने कहा, ‘आडवाणी कहते थे कि भाजपा अलग सोच वाली पार्टी है। हम जानते हैं कि हम दूसरे दलों से कितने अलग हैं।’

गडकरी की भाजपा नेताओं को चेतावनी
गडकरी ने आगे कहा कि जनता ने भाजपा को इसलिए चुना है क्योंकि कांग्रेस ने गलतियां कीं थीं। उन्होंने भाजपा नेताओं को चेताया कि पार्टी इसी तरह की गलतियों को दोहरा रही है। भाजपा नेता ने कहा,‘आने वाले दिनों में भाजपा नेताओं को यह समझना होगा कि राजनीति समाज और आर्थिकी में बदलाव का एक जरिया है।’उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भाजपा को भ्रष्टाचार मुक्त देश बनाना है।

‘जो करेगा जाति की बात, उसे पड़ेगी कसकर लात’
इसके बाद गडकरी ने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में जातिवाद को लेकर बहुत बयानबाजी होती हैं। गडकरी ने कहा, ‘मैंने तय किया है कि मैं जातिवाद की राजनीति का समर्थन नहीं करूंगा। मैंने लोगों से कहा है कि मैं जात-पात की राजनीति में नहीं उलझूंगा।’ गडकरी ने चेतावनी दी, ‘जो करेगा जाति की बात, उसे पड़ेगी कसकर लात।’ गडकरी ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी व्यक्ति को उसके कामों की वजह से जाना जाता है ना कि जाति से। आपको बता दें कि महाराष्ट्र में अक्टूबर-नवंबर में 288 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं।

ग्राम न्यायालयों से जल्द मिलेगा न्याय, लंबित नहीं रहेंगे मुकदमे, सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश

 नई दिल्ली:  सुप्रीम कोर्ट ने ग्राम न्यायालयों की स्थापना को लेकर तेजी से काम करने के लिए कहा है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ग्राम न्यायालय से लोगों को सुलभता और अपने दरवाजे पर ही तेजी से न्याय मिलेगा। इसके अलावा ट्रायल कोर्ट में लंबित मामलों में कमी आएगी। कोर्ट ने 2008 में कानून पारित होने के बाद ग्राम न्यायालयों की स्थापना में तेजी लाने के लिए कहा। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के मुख्य सचिव और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को ग्राम न्यायालयों की स्थापना, कामकाज और मौजूदा बुनियादी ढांचे का विवरण देते हुए छह सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

न्यायाधीश बीआर गवई और केवी विस्वनाथन ने एनजीओ नेशनल फेडरेशन ऑफ सोसाइटीज फॉर फास्ट जस्टिस और अन्य द्वारा 2019 में दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में सभी केंद्र और राज्य सरकारों को ग्राम न्यायालयों की स्थापना के लिए कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की गई थी। इसमें कहा गया था कि ग्राम न्यायालय के लिए उच्च न्यायालय की सलाह पर राज्य सरकार न्यायाधिकारी नियुक्त करेगी।

शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि कानून पारित होने के 16 साल बाद भी देश में केवल 264 ग्राम न्यायालय कार्यरत हैं। कानून पारित होने के बाद से अब तक छह हजार ग्राम न्यायालय स्थापित हो जाने चाहिए थे। इस पर पीठ ने कहा कि ग्राम न्यायालय की स्थापना से लोगों को त्वरित न्याय मिलेगा। साथ ही ट्रायल कोर्ट में लंबित मामले कम होंगे। पीठ ने कहा कि न्याय के अधिकार में सुलभ न्याय का अधिकार भी शामिल है।

पीठ ने सभी राज्य सरकार के मुख्य सचिव और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को ग्राम न्यायालय की स्थापना, कामकाज के बारे में छह सप्ताह में शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी निर्देश दिए कि शपथ पत्र में न्यायालयों की स्थापना के लिए मौजूद बुनियादी ढांचे का भी जिक्र किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शपथ पत्र दाखिल करने से पहले राज्य सरकार के मुख्य सचिव और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल बैठक करके ग्राम न्यायालय की स्थापना को लेकर बनाई गई योजना पर चर्चा कर लें। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।

देश विरोधी एजेंडे को बढ़ावा देने का आरोप, लिबिया में मौजूद ISIS आतंकवादी समेत दो के खिलाफ चार्जशीट दायर

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अपने बयान में कहा है, कि इस साल फरवरी में कई स्थानों पर तलाशी के बाद गिरफ्तार किए गए मोहम्मद जोहेब खान के साथ लीबिया में मौजूद मोहम्मद शोएब खान के खिलाफ आईएसआईएस के भारत विरोधी एजेंडे को बढ़ावा देने की साजिश में आरोप पत्र दाखिल किया गया है।

भारत विरोधी एजेंडे को बढ़ावा देने का आरोप
एनआईए की विशेष अदालत के समक्ष शुक्रवार को दाखिल चार्जशीट में दोनों को आईएसआईएस आतंकी साजिश मामले में प्रमुख साजिशकर्ता बताया गया है, जो वैश्विक आतंकी नेटवर्क के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद), महाराष्ट्र से जुड़े मॉड्यूल से जुड़ा है। आतंकवाद निरोधी एजेंसी की तरफ से मामले की जांच में दोनों आरोपियों की संलिप्तता वाले भारत विरोधी गतिविधियों के जाल का पता चला है।

‘एक वेबसाइट भी बनाने में जुटे थे दोनों आरोपी’
देश में आईएसआईएस के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए काम कर रही एजेंसी ने पाया कि दोनों लोगों ने आईएसआईएस के स्वघोषित खलीफा के प्रति निष्ठा की शपथ ली थी। जबकि एक साजिश के तहत भारत में कई आतंकी हमले करने के बाद अफगानिस्तान या तुर्की भागने की योजना बनाने वाले आरोपियों को आईएसआईएस की चरमपंथी और हिंसक विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए एक वेबसाइट विकसित करने में भी सक्रिय थे।

‘व्हाट्सएप ग्रुप में भेजते थे विस्फोट बनाने के तरीके’
मामले में एनआईए ने कहा कि वो वेबसाइट के जरिए से दुनिया भर के युवाओं को आईएसआईएस में शामिल करने की योजना बना रहे थे। वहीं जांच में आगे पता चला कि मोहम्मद शोएब खान की तरफ से भर्ती किए गए मोहम्मद जोहेब खान ने एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया था। एजेंसी ने बताया कि उसने औरंगाबाद इलाके के 50 से अधिक युवाओं को भारत में आईएसआईएस की नापाक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए कट्टरपंथी बनाने और भर्ती करने के इरादे से ग्रुप में जोड़ा था। जिसमें आरोपी विस्फोटकों के निर्माण और आईईडी के निर्माण से जुड़े वीडियो साझा कर रहे थे।

‘आरोपियों ने बनाई थी आतंकी हमले की योजना’
जानकारी के मुताबिक उन्होंने कार्रवाई की एक विस्तृत योजना भी तैयार की थी, जिसमें भारत में कई स्थानों पर आतंकवादी हमलों की योजना बनाना, तैयारी करना और उन्हें अंजाम देना और हमलों को अंजाम देने के बाद की जाने वाली कार्रवाई शामिल थी। वहीं एनआईए की जांच में पता चला है कि आरोपियों ने भारत की सुरक्षा, इसके धर्मनिरपेक्ष लोकाचार और संस्कृति और शासन की लोकतांत्रिक प्रणालियों को खतरे में डालने की साजिश रची थी।

कांची शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती बोले- राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ब्राह्मणों का मजबूत होना आवश्यक

कांची शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती जी महाराज ने कहा है कि इस दुनिया की रक्षा और विकास के लिए भारत का शक्तिशाली होना आवश्यक है और भारत की संस्कृति की रक्षा और इसके विकास के लिए ब्राह्मणों को शक्तिशाली होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण चाहे जहां हों, और चाहे जिस भूमिका में हों, उन्हें अपने उन स्वधर्मों का पालन करना चाहिए, जिन्हें सनातन धर्म की परंपरा में उनके लिए आवश्यक बताया गया है। सनातन संस्कृति में देश को सही मार्ग दिखाना, अध्ययन-अध्यापन, यज्ञ करना और यज्ञ करवाना, उपनयन संस्कार करना, दान देना और दान लेना ब्राह्मण के धर्म बताए गए हैं।

ब्राह्मण ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (BOA) के द्वारा देश के विकास में प्रमुख भूमिका निभाने वाले ब्राह्मणों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर दिए अपने संदेश में विजयेंद्र सरस्वती जी महाराज ने कहा कि कलयुग में संघ को ही शक्ति बताया गया है, इसलिए पूरे देश में उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक सभी ब्राह्मणों को एक सूत्र में बंध जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण छात्र जो गरीब हों, उनको पढ़ने के लिए, गरीब ब्राह्मण कन्याओं के विवाह के लिए और अन्य गरीब ब्राह्मण को आगे बढ़ाने के लिए यथासंभव प्रयास किया जाना चाहिए। इसके लिए सबको अपना सहयोग देना चाहिए।

‘सबका विकास हमारा लक्ष्य’
ब्राह्मण ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया के संस्थापक और मुख्य संरक्षक पंडित सुखबीर शर्मा ने कहा कि इस संस्था को ब्राह्मणों के लिए बनाया गया है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि वह समझ में किसी भी अलग संस्था या वर्ग से किसी तरह का कोई विरोध रखते हो उनका लक्ष्य पूरे देश को आगे बढ़ाना है। इसके लिए समाज में हर व्यक्ति हर संस्था और हर वर्ग का सहयोग आवश्यक है, लेकिन समय के साथ विकास की धारा में पीछे रहे ब्राह्मणों को आगे लाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज को हमेशा दिशा दिखाता रहा है, आज उसे मजबूत करने की जरूरत है जिस देश की धाम और संस्कृति सुरक्षित रहे।

‘एससी-एसटी फंड का दुरुपयोग दिखा रहा राहुल का दोहरा चरित्र’; भाजपा ने खोला कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा

बंगलूरू:  एक बार फिर भाजपा ने कांग्रेस सरकार को एससी एसटी के कल्याण के लिए निर्धारित फंड का दुरुपयोग चुनाव के दौरान किए वादों को पूरा करने में करने का आरोप लगाया। कानूनी मंत्री ने कहा कि कांग्रेस जो कर रही है वह संविधान का उल्लंघन है। यह राहुल गांधी का दोहरा मानदंड को दर्शाता है।

भाजपा ने शुक्रवार को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कल्याण के लिए निर्धारित फंड का दुरुपयोग राज्य चुनावों के दौरान राहुल गांधी द्वारा किए गए वादों को पूरा करने के लिए करने का आरोप लगाया। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार जो कर रही है, वह संविधान का उल्लंघन है और उन्होंने कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, “कर्नाटक की जनता को धोखा दिया जा रहा है। राहुल गांधी के दोहरे मानदंडों का खुलासा हो गया है।

उन्होंने कहा कि एक तरफ राहुल गांधी संविधान की एक प्रति लेकर घूम रहे हैं, जबकि राज्य में संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन खुलेआम किया जा रहा है। उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कि दावा किया कि एससी और एसटी कल्याण के लिए निर्धारित 39,121 करोड़ रुपये में से 14,730 करोड़ रुपये से अधिक का उपयोग कांग्रेस द्वारा 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान अपनी गारंटी के तहत किए गए विभिन्न रियायतों को लागू करने के लिए किया गया है। वहीं कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कांग्रेस पर हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों के दौरान विपक्ष पर फर्जी कहानी फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “वे कुछ सीटें जीतने में सफल हो सकते हैं, लेकिन लोगों का दिल कभी नहीं जीत सकते।”

हाथरस भगदड़ की जांच वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, 121 लोगों की हुई थी मौत

हाथरस भगदड़ की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को सुनवाई करेगा। 2 जुलाई को हुई भगदड़ में 121 लोगों की मौत हुई थी।

सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ 12 जुलाई को इस पर सुनवाई करेगी। अधिवक्ता विशाल तिवारी ने याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार को घटना पर स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने और अधिकारियों, कर्मचारियों व अन्य के खिलाफ उनकी लापरवाही के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्देश देने की भी मांग की है।

साथ ही राज्यों को किसी भी धार्मिक या अन्य आयोजनों में जनता की सुरक्षा के लिए भगदड़ या अन्य घटनाओं को रोकने के दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।

बता दें कि हाथरस के सिकंदराराऊ के फुलरई मुगलगढ़ी गांव में 2 जुलाई, मंगलवार को साकार विश्वहरि बाबा उर्फ भोले बाबा का सत्संग शुरू हुआ। सत्संग में 80 हजार लोगों की अनुमति के बावजूद करीब 2.50 लाख से अधिक लोग आ गए। बाबा के सत्संग समाप्ति की घोषणा के साथ ही बाबा की प्राइवेट आर्मी ने कार्यक्रम स्थल की सारी व्यवस्था को पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया। लेकिन भीड़ को संभालने के लिए न ही बाबा की निजी आर्मी और न ही पुलिसकर्मी पर्याप्त थे।

स्थानीय लोगों के अनुसार, जब बाबा का काफिला निकला तब भीड़ को रोक दिया गया। इस दौरान चरणों की रज लेने के चक्कर में अनुयायी अनियंत्रित हो गए। भगदड़ के दौरान लोग मरते रहे और बाबा के कारिंदे गाड़ियों से भागते रहे। किसी ने भी रुककर हालात को जानने की कोशिश नहीं की।

हादसे को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मोर्चा संभालने के बाद यूपी पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई को अंजाम देना शुरू कर दिया। पुलिस ने छह अभियुक्तों की गिरफ्तारी की, जिनमें सत्संग आयोजन समिति से जुड़े चार पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में राम लडैते यादव (मैनपुरी), मंजू यादव (हाथरस), उपेंद्र सिंह यादव (फिरोजाबाद), मंजू देवी यादव (हाथरस), मेघ सिंह (हाथरस) और मुकेश कुमार (हाथरस) शामिल हैं। ये सभी सेवादार हैं।

बिहार के लिए पिटारा खोलेगी केंद्र सरकार; मेट्रो- एयरपोर्ट की मिलेगी सौगात, विशेष राज्य के दर्जे की मांग

नई दिल्ली:  आम बजट में मोदी सरकार अपनी दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी जदयू और बिहार का विशेष ख्याल रखेगी। जदयू की मांग के अनुरूप बजट में राज्य के कुछ शहरों में मेट्रो परियोजना, कम से कम आधा दर्जन नए एयरपोर्ट और मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की जाएगी। जदयू की बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग पर नए साल में विचार किया जाएगा, जबकि थर्मल प्लांट की स्थापना की मांग पर फिलहाल विचार विमर्श जारी है।

जदयू के वरिष्ठ नेता के आम बजट में बिहार का विशेष ख्याल रखे जाने की संभावना को पार्टी की दबाव की रणनीति से जोड़ना उचित नहीं है। दरअसल राज्य की सत्ता में भाजपा भी साझेदार है और अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राजनीतिक कारणों से भी राज्य को प्राथमिकता मिलनी तय है। फिर नीति आयोग से लेकर आर्थिक जगत की दूसरी रिपोर्ट भी बताती है कि बिहार का विशेष ख्याल रखने की जरूरत है।

जदयू ने बीते दिनों बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने, थर्मल प्लांट की स्थापना करने, नौ नए एयरपोर्ट, चार मेट्रो लाइन और सात नए मेडिकल कॉलेज की मांग की थी। पार्टी ने 20 हजार किमी की सड़क की मरम्मत के लिए अलग से राशि उपलब्ध कराने की भी मांग की थी। इनमें आधा दर्जन नए एयरपोर्ट, दो शहरों में मेट्रो, चार से पांच नए मेडिकल कॉलेज खोलने पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। सूत्रों के मुताबिक विशेष राज्य का दर्जा और थर्मल प्लांट की स्थापना पर संभवत: नए साल में विचार विमर्श होगा।

विशेष राज्य के दर्जे की मांग हुई तेज
बिहार के लिए विशेष राज्य के दर्जे की मांग पिछले कई वर्षों से एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और आर्थिक मुद्दा बनी हुई है। केंद्रीय बजट के करीब आने के साथ, एक बार फिर से यह मांग जोर पकड़ने लगी है। नीतीश कुमार के करीबी मंत्री विजय कुमार चौधरी ने इस मांग को अपनी पार्टी और एनडीए के घटक दलों के सुर में सुर मिलाते हुए मजबूती से उठाया है। इससे पहले एनडीए में शामिल चिराग पासवान और जीतन राम मांझी ने भी बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की वकालत कर चुके हैं।