Friday , July 12 2024

Editor

सड़कों पर हर साल 52 हजार गाड़ियों का दबाव, जिले में पिछले दस साल में बढ़ गए पांच लाख से अधिक वाहन

मुरादाबाद :  मुरादाबाद जिले की सड़कों पर हर साल 52 हजार से अधिक गाड़ियां उतर रहीं हैं। पिछले दस वर्षों में जिले में गाड़ियों की संख्या में पांच लाख से अधिक की वृद्धि हुई हैं। लेकिन शहर अभी भी इन वाहनों के लिए नो पार्किंग है। वाहनों की बढ़ती संख्या ट्रैफिक व्यवस्था को प्रभावित करने लगी है।

हालांकि ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए शहर की कुछ सड़कों का चौड़ीकरण जरूर किया गया है। जिले में वाहनों के पंजीयन की रफ्तार साल दर साल बढ़ने लगी है। आरटीओ कार्यालय में हर साल औसतन 52 हजार वाहन पंजीकृत किए जाते हैं। इसमें करीब पांच हजार चार पहिया वाहन होते हैं।

इस साल जून तक 23573 वाहनों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। इसमें दो पहिया वाहनों की संख्या 23573 है। जबकि चार पहिया वाहन 4242 हैं। परिवहन सेवा के डैस बोर्ड से लिए गए आंकड़ों के मुताबिक जिले में 874318 वाहन पंजीकृत हैं। इसमें निजी और व्यवसायिक सभी वाहन शामिल हैं।

इन वाहनों में करीब साठ फीसदी वाहन तो पिछले दस साल में पंजीकृत हुए हैं। वाहनों की संख्या बढ़ने से बाजारों में लोगोंं को जाम की समस्या से जूझना पड़ता है। इसकी सबसे बड़ी वजह शहर में पार्किंग की सुविधा न होना है। लोग बाजारों में आड़े तिरछे वाहन खड़े कर खरीदारी करते हैं।

यहां सड़कों का हुआ चौड़ीकरण

  • इंपीरियल तिराहे से बुधबाजार पुलिस चौकी तक
  • बंगलागांव चौराहे से मौसम पैलेस तक
  • महिला थाने से डिप्टीगंज चौराहे तक
  • महिला थाने से जिगर कॉलोनी पुलिस चौकी तक
  • पुलिस लाइन गेट से बंगलागांव चौराहे तक
  • कांठ रोड पर गुलाब मस्जिद से सिद्ध हॉस्पिटल तक

मंडल में सबसे ज्यादा वाहन मुरादाबाद में
जिले में वाहनों के पंजीयन में मुरादाबाद अव्वल है। यहां मंडल मंडल में सबसे ज्यादा 874318 वाहन हैं। दूसरे नंबर पर बिजनौर में 825920 पंजीकृत हैं। सबसे कम संभल में 284318 वाहन हैं। वहीं सबसे अधिक टैक्स डिफाल्टर बिजनौर में हैं। यहां इनकी संख्या 8708 है। रामपुर में सबसे कम 12347 डिफाल्टर हैं।

13 जुलाई को लगेगी लोक अदालत, वाद का निस्तारण होगा एक दिन में, ऐसे रखे जा सकेंगे मामले

लोक अदालत, जहां मामले का निस्तारण एक ही दिन में होता है। उसके निर्णय की कहीं अपील भी नहीं की जा सकती है। ऐसी ही लोक अदालत का आयोजन 13 जुलाई को किया जाएगा।

हाथरस जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अपर जनपद न्यायाधीश प्रशांत कुमार ने बताया कि जनपद न्यायाधीश सतेन्द्र कुमार के आदेशानुसार एवं नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय लोक अदालत अपर जनपद न्यायाधीश महेन्द्र श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में 13 जुलाई को प्रातः 10 बजे से जनपद मुख्यालय के साथ ही साथ मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण, स्थायी लोक अदालत, उपभोक्ता फोरम, कलैक्ट्रेट एवं समस्त तहसील मुख्यालयों पर तथा अन्य विभागों में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा।

ऐसे रखें मामले
पक्षकारगण, अभियुक्तगण अपने मामले का राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारित कराना चाहते हैं, तो वह अपना प्रार्थना पत्र स्वयं अथवा अपने अधिकृत अधिवक्ता के माध्यम से संबंधित न्यायालय, कार्यालय में प्रस्तुत करके अपने मामलें का निस्तारण कराकर लोक अदालत का लाभ उठा सकते हैं।

ये रखे जाते हैं मामले
सभी सुलह योग्य आपराधिक वादों, सिविल वादों, भूमि अधिग्रहण वादों, मोटर दुर्घटना प्रतिकर के वाद, पारिवारिक वादों, स्टाम्प वादों, उपभोक्ता फोरम वादों, राजस्व वादों, चकबंदी वादों, श्रम मामलों, नगर पालिका टैक्स वसूली मामलों, विद्युत अधिनियम के अन्तर्गत सुलह योग्य वाद, अन्तिम रिपोर्ट धारा 446 द0प्र0सं0 संबंधी मामले, पब्लिक प्रिविसेज एक्ट संबंधी मामले, उत्तराधिकार संबंधी मामले, आयुध अधिनियम के प्रकरण, बीमा संबंधी वाद, स्थानीय विधियों के अन्तर्गत शमनीय वाद, सेवा, वेतन संबंधी वाद, सेवानिवृत्ति परिलाभों से संबंधित प्रकरण, किरायेदारी वाद, वन अधिनियम के प्रकरणों का निस्तारण किया जायेगा।

दुष्कर्म के विरोध… युवक ने कर दी महिला की हत्या, पुलिस ने हत्यारोपी को भेजा जेल, दस से हुई पूछताछ

मुरादाबाद:  मुरादाबाद के बिलारी क्षेत्र में गन्ने के खेत में 22 साल के युवक ने दुष्कर्म का विरोध करने पर 48 वर्षीय महिला की गला घोंटकर हत्या की थी। पुलिस ने बृहस्पतिवार को हत्यारोपी को गिरफ्तार कर हत्याकांड का खुलासा कर दिया। आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।

एसपी देहात संदीप कुमार मीना ने बताया कि बिलारी थाना क्षेत्र के गांव निवासी 48 वर्षीय महिला आठ जुलाई को खेत पर धान की पौध उखाड़ने गई थी। इसके बाद वह घर वापस नहीं आई। पुलिस और गांव के लोगों ने महिला की तलाश की तो उसका शव गन्ने के खेत में पड़ा मिला।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई थी। जांच पड़ताल में जुटी पुलिस ने शक के आधार बिलारी के भूड़ मरेसी निवासी लाल सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ की। उसने पुलिस को बताया कि घटना वाले दिन महिला अपने खेत में धान की पौध उखाड़ रही थी।

उसी के पास आरोपी लाल सिंह अपने खेत में काम कर रहा था। आरोपी लाल सिंह ने बताया कि शाम करीब चार बजे उसकी मां और भाई ट्रैक्टर लेकर घर चले गए। इसके बाद वह खेत पर अकेला था। इसी दौरान महिला ने पौध उखाड़ना बंद कर दिया और गन्ने के खेत में घास काटने घुस गई।

इसी दौरान आरोपी भी वहां पहुंच गया और उसने महिला के साथ दुष्कर्म की कोशिश की। महिला ने विरोध किया तो उसका मुंह दबा दिया था। जिससे वह बेहोश हो गई। बाद में आरोपी ने महिला के नाड़े से उसका गला घोंट दिया था।

दस लोगों से पूछताछ, तब लाल सिंह तक पहुंची पुलिस
बिलारी थाना प्रभारी आरपी सिंह और उनकी टीम ने इस केस पर पहले दिन से ही काम शुरू कर दिया था। महिला का शव जिस खेत में मिला था। उसके आसपास के खेतों में काम करने वाले दस लोगों से पूछताछ की। इसी दौरान पता चला कि उस दिन पूरे दिन लाल सिंह खेत पर ही मौजूद रहा था। तब पुलिस ने लाल सिंह को पकड़ लिया और उससे पूछताछ की।

मायावती बोलीं- मनुस्मृति पढ़ाने के प्रस्ताव को रद्द करना स्वागत योग्य फैसला, ये संविधान से मेल नहीं खाता

लखनऊ:  बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि विभाग में मनुस्मृति पढ़ाए जाने के प्रस्ताव को रद्द करना एक स्वागत योग्य फैसला है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने जिस संविधान की रचना की वो मनुस्मृति से कतई मेल नहीं खाता है।

उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर कहा कि भारतीय संविधान के मान-सम्मान व मर्यादा तथा इसके समतामूलक एवं कल्याणकारी उद्देश्यों के विरुद्ध जाकर दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि विभाग में मनुस्मृति पढ़ाए जाने के प्रस्ताव का तीव्र विरोध स्वाभाविक तथा इस प्रस्ताव को रद्द किए जाने का फैसला स्वागत योग्य कदम है।

उन्होंने आगे कहा कि परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने खासकर उपेक्षितों व महिलाओं के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के साथ ही मानवतावाद एवं धर्मनिरपेक्षता को मूल में रखकर सर्व स्वीकार भारतीय संविधान की संरचना की, जो मनुस्मृति से कतई मेल नहीं खाता है। अतः ऐसा कोई प्रयास बिल्कुल उचित नहीं। बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय में मनुस्मृति पढ़ाए जाने की बात की गई थी जिसका प्रबल विरोध हुआ था।

बसपा के मैदान में उतरने से बदलेंगे दलों के समीकरण, भाजपा और सपा में टिकट को लेकर दौड़

मुरादाबाद:बसपा के उपचुनाव में उतरने से कुंदरकी विधानसभा सीट के भी समीकरण बदल जाएंगे। दूसरे दलों के सियासी खेल बिगड़ सकते हैं। ऐसे में उपचुनाव में कूदने से पहले राजनीतिक दलों ने नए सिरे से तैयारियों पर मंथन शुरू कर दिया है। कुंदरकी सीट पर बसपा को आखिरी बार 2007 में जीत मिली थी।

वर्ष 2022 में कुंदरकी विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर सपा विधायक बने जियाउर्रहमान बर्क को सपा ने लोकसभा चुनाव में संभल सीट से उम्मीदवार बनाया था। चुनाव में जीत दर्ज कर जियाउर्रहमान बर्क अब विधायक से सांसद बन गए। उनके विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद कुंदरकी विधानसभा सीट पर अब उपचुनाव होना है।

हालांकि अभी उपचुनाव को लेकर कोई कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक दलों ने तैयारी शुरू कर दी है। कुंदरकी विधानसभा सीट को लेकर भाजपा ने प्रभारी तैनात कर दिए हंैं। भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए दावेदारों ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक अपनी फील्डिंग सजानी शुरू कर दी है।

वहीं सपा से टिकट के लिए 12 से अधिक लोगों ने दावेदारी भी पेश कर दी है। भाजपा और सपा की तैयारियों के बीच बसपा के भी चुनाव मैदान में उतरने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। मंडल स्तर पर बसपा पदाधिकारियों ने बैठकें भी करनी शुरू कर दी हैं।
बसपा के चुनाव में उतरने के संते पर भाजपा और सपा में नए सिरे से सियासी मंथन शुरू हो गया है। वहीें बसपा दो बार कुंदरकी सीट पर जीत दर्ज कर चुकी है। पिछले चुनाव में बसपा तीसरे स्थान पर रही।
दावेदारों की नजर बसपा पर भी

भाजपा और सपा से टिकट के दावेदारों की नजर अब बसपा पर भी है। दोनों के दावेदारों ने अंदर खाने बसपा के बड़े नेताओं से भी संपर्क साधना शुरू कर दिया है। ताकि अपने दल से टिकट नहीं मिलने की स्थिति में बसपा का विकल्प आजमाया जा सके।
बसपा का दलित-मुस्लिम समीकरण बन सकता है दलों के लिए चुनौती

बसपा का दलित-मुस्लिम समीकरण दूसरे दलों के लिए चुनौती बन सकते हैं। बसपा इसकी समीकरण के दम पर कुंदरकी विधानसभा सीट पर दो बार जीत दर्ज कर चुकी है। बसपा के टिकट पर हाजी अकबर दो बार विधायक बने।
आठ जोन बनाकर बसपा ने सौंपी जिम्मेदारी

मंडलीय कार्यालय पर बृहस्पतिवार को बसपा की मंडल स्तरीय बैठक बुलाई गई, जिसमें कुंदरकी विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव की तैयारियों पर चर्चा की गई। उपचुनाव को जीतने की रणनीति बनाई गई है। साथ ही कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र को आठ जोन में बांटकर नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई।

स्मृति ईरानी पर टिप्पणियों से राहुल नाखुश, बोले- किसी को अपमानित करना कमजोर होने की निशानी… ऐसा न करें

लखनऊ:  लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अमेठी से पूर्व सांसद स्मृति ईरानी को लेकर सोशल मीडिया पर हो रही टिप्पणी पर नाखुशी जाहिर की है।उन्होंने एक्स पर कहा कि जीत और हार जीवन का हिस्सा हैं। मैं सभी से अपील करता हूं की स्मृति ईरानी के खिलाफ किसी भी तरह की अपमानजनक भाषा का प्रयोग न करें।

किसी को बेइज्जत और शर्मसार करना कमजोर होने की निशानी है ताकतवर होने की नहीं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि ऐसा न करें।बता दें कि भाजपा नेता स्मृति ईरानी मोदी सरकार के पहले दो कार्यकाल में मंत्री रह चुकी हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में अमेठी में राहुल गांधी को हराने के बाद उनका कद काफी बढ़ गया था। हालांकि, 2024 के चुनाव में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के करीबी किशोरी लाल शर्मा के सामने उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। नई सरकार में उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह भी नहीं मिली।पूर्व केंद्रीय मंत्री को अपना सरकारी आवास खाली करना पड़ा है जिसके बाद से वह सोशल मीडिया पर लगातार निशाने पर हैं। इसे लेकर राहुल गांधी ने एक्स पर टिप्पणी की है।

स्कूल नौकरी घोटाले की जांच तेज, सीबीआई तलाश रही ओएमआर शीट, दो सर्वर और हार्ड डिस्क जब्त

सीबीआई ने पश्चिम बंगाल में स्कूल नौकरी घोटाले की जांच तेज कर दी है। शुक्रवार को सीबीआई ने एक कोलकाता की एक निजी कंपनी के परिसर में तलाशी अभियान चलाया। यहां से सीबीआई ने दो सर्वर और हार्ड डिस्क जब्त की।

सीबीआई अफसरों की टीम ने शहर के दक्षिणी एवेन्यू क्षेत्र स्थित मैसर्स एस बसु एंड रॉय कंपनी पर तलाशी के दौरान सर्वर और हार्ड डिस्क जब्त किए। सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि सर्वर और हार्ड डिस्क की जांच में भर्ती परीक्षा में प्रयोग की गई ओएमआर शीट के डिजिटल बैकअप को प्राथमिकता दी जाएगी। अफसरों ने बताया कि बैकअप खंगालने के लिए छह सीबीआई अफसर और दो साइबर क्राइम विशेषज्ञों की टीम बनाई गई है। जब्त किए गए सर्वर और हार्ड डिस्क में मौजूद डाटा को रीस्टोर करने के लिए फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी। अफसरों ने कहा कि ओएमआर शीट की डिजिटल कॉपी के बैकअप को रीस्टोर करने पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है।

पिछले सप्ताह कोलकाता हाईकोर्ट ने सीबीआई को शिक्षक पात्रता परीक्षा 2014 में प्रयोग हुईं ओएमआर शीट की डिजिटल जांच करने और नष्ट किए गए सर्वर, डिस्क और अन्य सुरक्षित डाटा को डिजिटली रूप से तलाश करने के लिए कहा था। कोर्ट ने सीबीआई को यह भी निर्देश दिया था कि कंप्यूटर, सर्वर और हार्ड डिस्क मैसर्स एस बसु राय एंड कंपनी के हैं या नहीं, इसकी जांच के लिए निजी विशेषज्ञों और निजी संस्थानों जैसे एनआईसी, विप्रो, टीसीएस, इन्फोसिस के विशेषज्ञों की मदद ली जाए। दरअसल एस बसु राय एंड कंपनी ने 2014 में पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ प्राइमरी एजुकेशन द्वारा कराई गई शिक्षक पात्रता परीक्षा में उपयोग की गई ओएमआर शीट को स्कैन किया था।

कोर्ट ने यह भी कहा था कि विशेषज्ञ संस्थाओं द्वारा की गई जांच में आने वाले खर्च की मांग सीबीआई को पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ प्राइमरी एजुकेशन से करनी होगी। मुकदमे की अगली सुनवाई 23 अगस्त को होगी।

उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने ईडी पर उठाया सवाल, कहा- राज्य में अनियमितताओं की जांच के लिए है एसआईटी

बंगलूरू:राज्य सरकार द्वारा संचालित निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं के लिए पहले से ही एसआईटी काम कर रही है। कर्नाटक उपमुख्यमंत्री ने इस बात का जिक्र करते हुए कहा कि एसआईटी के होते हुए ईडी को जांच करने की जरूरत नहीं है।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने शुक्रवार को कहा ईडी के जांच पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि राज्य में पहले से ही राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल काम कर रहा है। तो राज्य सरकार के संचालित निगम की कथित वित्तीय अनियमितताओं के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को जांच की कोई जरूरत नहीं है।

उप मुख्यमंत्री शिवकुमार राज्य कांग्रेस के प्रमुख भी हैं। हाल ही में कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड में अनियमितताओं से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत एजेंसी द्वारा पूर्व मंत्री बी नागेंद्र को हिरासत में लिए जाने पर उन्होंने कहा कि हम एसआईटी के माध्यम से जांच कर रहे हैं, ईडी जांच कोई जरूरत नहीं थी, लेकिन वे ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं इसके बारे में जानने की कोशिश करूंगा और फिर इस पर बोलूंगा।”

दरअसल, कथित अनियमितताओं के चलते नागेंद्र ने 6 जून को अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। वहीं पिछले दो दिनों में ईडी ने नागेंद्र और सत्तारूढ़ कांग्रेस विधायक बसनगौड़ा दद्दाल, जो निगम के अध्यक्ष भी हैं, उनसे जुड़े कई परिसरों पर तलाशी ली। सूत्रों की मानें तो एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया है। इसके तहत कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र में करीब 20 स्थानों पर छापेमारी की।

वहीं मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा भूमि खोने वालों को कथित धोखाधड़ी से भूखंड आवंटित करने के मामले में मैसूर में भाजपा विरोध कर रही है। इस मामले में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी को दिए गए भूखंड शामिल हैं। इस मामले पर डीके शिवकुमार ने कहा, “मैसूर में, भाजपा राजनीति कर रहे हैं, उन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। जब समय आएगा, हम इसका जवाब देंगे।” उन्होंने दावा किया कि “कोई घोटाला नहीं हुआ है, जो कुछ भी हुआ है, वह भाजपा के कार्यकाल में हुआ है।

वहीं मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी गुरुवार को आरोपों से इनकार कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके खिलाफ़ नाराज़गी के कारण साजिश रची जा रही है क्योंकि वह पिछड़े वर्ग के समुदाय से हैं और दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने कहा कि वह भाजपा के ऐसे कदमों से नहीं डरेंगे। सिद्धारमैया के इस दावे पर एक सवाल का जवाब देते हुए कि उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह पिछड़े वर्ग से हैं। शिवकुमार ने कहा, “केवल एक बड़ा राज्य (कांग्रेस के साथ) है, इसलिए वे राज्य का मनोबल गिराना चाहते हैं, हम ऐसा नहीं होने देंगे।”

‘जो करेगा जाति की बात, उसे पड़ेगी कसकर लात’, गडकरी ने भाजपा नेताओं को चेताया; कहा- काम पर ध्यान दें

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता नितिन गडकरी ने जातिवाद की राजनीति को लेकर सख्त बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि जो भी देश में जाति की बात करेगा, वे उसे जमकर फटकार लगाएंगे। गडकरी ने यह भी कह दिया,‘जो करेगा जाति की बात, उसे पड़ेगी कसकर लात।’

‘जो गलती कांग्रेस ने की उसे ना दोहराएं’
गडकरी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने लगातार मतदाताओं का भरोसा जीता है। उन्होंने भाजपा नेताओं से यह भी कहा कि वो गलती न दोहराएं, जिस वजह से कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई है। गडकरी ने स्पष्ट रूप से कहा,‘अगर हम कांग्रेस की तरह काम करते रहेंगे तो कांग्रेस का सत्ता से बाहर जाने का कोई फायदा नहीं और हमारा सत्ता में आने का भी कोई फायदा नहीं है।’ आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के बहुमत हासिल न कर पाने को लेकर तरह-तरह की बातें कहीं जा रहीं थीं। गडकरी का यह बयान उन बयानों के संदर्भ में आया है।

गडकरी ने आडवाणी के कथन को याद किया
दरअसल, गडकरी गोवा के पणजी में भाजपा नेताओं की एक बैठठक को संबोधित कर रहे थे। इस बैठक में गोवा भाजपा अध्यक्ष सदानंद तनावड़े और मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत भी मौजूद थे। अपने 40 मिनट के संबोधन में गडकरी पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के ‘भाजपा अलग सोच वाली पार्टी है’ वाले बयान को भी याद किया। भाजपा नेता ने कहा, ‘आडवाणी कहते थे कि भाजपा अलग सोच वाली पार्टी है। हम जानते हैं कि हम दूसरे दलों से कितने अलग हैं।’

गडकरी की भाजपा नेताओं को चेतावनी
गडकरी ने आगे कहा कि जनता ने भाजपा को इसलिए चुना है क्योंकि कांग्रेस ने गलतियां कीं थीं। उन्होंने भाजपा नेताओं को चेताया कि पार्टी इसी तरह की गलतियों को दोहरा रही है। भाजपा नेता ने कहा,‘आने वाले दिनों में भाजपा नेताओं को यह समझना होगा कि राजनीति समाज और आर्थिकी में बदलाव का एक जरिया है।’उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भाजपा को भ्रष्टाचार मुक्त देश बनाना है।

‘जो करेगा जाति की बात, उसे पड़ेगी कसकर लात’
इसके बाद गडकरी ने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति में जातिवाद को लेकर बहुत बयानबाजी होती हैं। गडकरी ने कहा, ‘मैंने तय किया है कि मैं जातिवाद की राजनीति का समर्थन नहीं करूंगा। मैंने लोगों से कहा है कि मैं जात-पात की राजनीति में नहीं उलझूंगा।’ गडकरी ने चेतावनी दी, ‘जो करेगा जाति की बात, उसे पड़ेगी कसकर लात।’ गडकरी ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी व्यक्ति को उसके कामों की वजह से जाना जाता है ना कि जाति से। आपको बता दें कि महाराष्ट्र में अक्टूबर-नवंबर में 288 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं।

ग्राम न्यायालयों से जल्द मिलेगा न्याय, लंबित नहीं रहेंगे मुकदमे, सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश

 नई दिल्ली:  सुप्रीम कोर्ट ने ग्राम न्यायालयों की स्थापना को लेकर तेजी से काम करने के लिए कहा है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ग्राम न्यायालय से लोगों को सुलभता और अपने दरवाजे पर ही तेजी से न्याय मिलेगा। इसके अलावा ट्रायल कोर्ट में लंबित मामलों में कमी आएगी। कोर्ट ने 2008 में कानून पारित होने के बाद ग्राम न्यायालयों की स्थापना में तेजी लाने के लिए कहा। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के मुख्य सचिव और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को ग्राम न्यायालयों की स्थापना, कामकाज और मौजूदा बुनियादी ढांचे का विवरण देते हुए छह सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

न्यायाधीश बीआर गवई और केवी विस्वनाथन ने एनजीओ नेशनल फेडरेशन ऑफ सोसाइटीज फॉर फास्ट जस्टिस और अन्य द्वारा 2019 में दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में सभी केंद्र और राज्य सरकारों को ग्राम न्यायालयों की स्थापना के लिए कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की गई थी। इसमें कहा गया था कि ग्राम न्यायालय के लिए उच्च न्यायालय की सलाह पर राज्य सरकार न्यायाधिकारी नियुक्त करेगी।

शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि कानून पारित होने के 16 साल बाद भी देश में केवल 264 ग्राम न्यायालय कार्यरत हैं। कानून पारित होने के बाद से अब तक छह हजार ग्राम न्यायालय स्थापित हो जाने चाहिए थे। इस पर पीठ ने कहा कि ग्राम न्यायालय की स्थापना से लोगों को त्वरित न्याय मिलेगा। साथ ही ट्रायल कोर्ट में लंबित मामले कम होंगे। पीठ ने कहा कि न्याय के अधिकार में सुलभ न्याय का अधिकार भी शामिल है।

पीठ ने सभी राज्य सरकार के मुख्य सचिव और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को ग्राम न्यायालय की स्थापना, कामकाज के बारे में छह सप्ताह में शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी निर्देश दिए कि शपथ पत्र में न्यायालयों की स्थापना के लिए मौजूद बुनियादी ढांचे का भी जिक्र किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शपथ पत्र दाखिल करने से पहले राज्य सरकार के मुख्य सचिव और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल बैठक करके ग्राम न्यायालय की स्थापना को लेकर बनाई गई योजना पर चर्चा कर लें। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।