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भगवान श्रीकृष्ण की अल्हादिनी शक्ति श्रीराधारानी का जन्म 14 को

 

मथुरा से अजय ठाकु
गोवर्धन। श्रीकृष्ण के जन्म उत्सव के ठीक पंद्रह दिन बाद ब्रजभानु दुलारी लाड़ली जी जन्म उत्सव मनाया जाएगा। ब्रज के मंदिरों में इन दिनों राधाष्टमी मनाने की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

देश-विदेश से बड़ी संख्या में राधाकृष्ण के अनुयायी भगवान श्रीकृष्ण की आल्हादिनी शक्ति के जन्मोत्सव पर खुशी मनाने के लिए यहां आ रहे हैं। 14 सितंबर को राधाष्टमी पर राधारानी के पिता वृषभानु की नगरी बरसाना एवं उनकी लीलाओं की पावन स्थली राधाकुंड के मंदिरों में तैयारियां जोरों पर हैं। बरसाना में स्थित लाडली जी मंदिर के सेवायत रामभरोसी ने बताया कि जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर 13 सितंबर को दोपहर तक राधाकृष्ण स्वर्ण जड़ित शीश महल में विराजमान होंगे।

इस दौरान राधाकृष्ण के विग्रह को कीमती पोशाक के साथ रत्न जड़ित सोने के आभूषण धारण कराए जाएंगे। सायंकाल राधारानी की शोभायात्रा मंदिर परिसर में निकाली जाएगी। भोर बेला में राधा जी के जन्म का अभिषेक होगा। वहीं राधाकुंड में अपरान्ह 11 बजे से राधारानी के जन्म का अभिषेक होगा। राधाकुंड में कृष्ण के साथ युगल स्वरूप में विराजती हैं राधारानी


गोवर्धन। राधा एक शक्ति हैं जो कि कृष्ण के साथ हैं और राधा-कृष्ण दिव्य शक्ति से एक दूसरे में समाहित हैं। गिरिराज जी की तलहटी के प्रमुख तीर्थ स्थल राधाकुंड में आज भी द्वापर युगीन भगवान की लीलाओं के साक्षी युगल स्वरूप में ब्रषभानु दुलारी युगल स्वरूप में भगवान कृष्ण के साथ विराजमान हैं। जल के रूप में राधारानी राधाकुंड-श्यामकुंड के संगम स्थल के रूप में तो दूसरी ओर परिक्रमा मार्ग में राधा-गोपीनाथ, राधा-गोविंद देव, राधा-कालाचांद, राधा-ब्रजबिहारी आदि युगल स्वरूप में दर्शन विराजमान हैं। राधाकुंड में राधाजी के जन्म उत्सव को लेकर देश ही नहीं बल्कि विदेशी भक्त भी उत्साहित हैं। राधा जी के जन्म को लेकर मंदिरों में तीन दिवसीय भजन संकीर्तन के आयोजन शुरू हो गये हैं। राधाकुंड में राधा जी ने भगवान श्रीकृष्ण के साथ मध्यान्ह लीला की है, इसीलिए आज भी राधा जी के जन्म का अभिषेक प्रातः बेला के बाद होगा। श्रीपाद रघुनाथ दास गोस्वामी गद्दी के गद्दीनशीन महंत बाबा केशव दास ने बताया कि राधाकुंड तट स्थित घाट वाले मंदिर राधा-गोपीनाथ में राधा जी का जन्म अभिषेक मंगलवार को दिन में 11 बजे से होगा। मंदिरों में राधा जी के जन्म उत्सव के उपलक्ष्य में घंटे-घड़ियाल, झांझ-मजीरे की धुन बजाई जाएगी।
राधा जी के जन्म की तैयारी में मठ-मंदिर
राधाकुंड-श्यामकुंड संगम तट के साथ-साथ श्रीराधा-गोपीनाथ, राधा-गोविंद देव, राधा-मदन गोपालदेव, श्रीजगन्नाथ देव जी महाराज, राधा ब्रजबिहारी, तमालतला महाप्रभु जी, राधा दामोदर, राधा विनोद देव, नूतन महाप्रभु मंदिर, राधा रमण देव, राधाकांत देव, समाधि मंदिर, तीन गोस्वामी समाधि, राधा काला चांद, कविराज गोस्वामी के साथ-साथ श्याम सुंदर मंदिर, गजाधर चैतन्य महाप्रभु मंदिर, निताई गौर मंदिर, राधा माधव मंदिर, जमाई विनोद मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, सीतानाथ मंदिर, मणिपुर मंदिर, साक्षी गोपाल मंदिर, कुंजबिहारी मंदिर गौड़ीय मठ आदि में राधा जन्म उत्सव की तैयारी चल रही हैं।

राधा जी के जन्म उत्सव पर खरीद रहे हैं पोशाक व कंठी माला
भक्तों में राधा जी के जन्म उत्सव को लेकर खासी तैयारी चल रही है। कान्हा के जन्म के बाद उनकी अल्हादिन शक्ति श्रीराधिका रानी के जन्म उत्सव को लेकर भक्त नई-नई पोशाक व कंठी-माला खरीद रहे हैं। आस्था में भक्त राधा नाम लिखी कंठी गले में पहनने के लिए ले रहे हैं। जन्म अभिषेक से पूर्व भक्त राधारानी में स्नान करेंगे।