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मैनपुरी 8 साल तक विद्युत विभाग पर करीब चौदह लाख के मामले में चले मुकदमे को कोर्ट ने किया खारिज

पंकज शाक्य

मैनपुरी- जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग मैनपुरी में मैसर्स किसान कोल्ड स्टोरेज भोगांव के संचालक आरिफ अली खां पुत्र आशिक अली खां ने यह कह कर अपना केस 31 अगस्त 2013 को प्रवन्ध निर्देशक विधुत आगरा, अधिशासी अभियंता विधुत , लेखाकार विधुत के विरुद दायर किया। उसने मई 2004 में कोल्ड स्टोरेज का कनेक्शन 633271 जो 145 किलोवाट का मंजूर कराया। अक्टूबर 2005 तक जो बिल आये उसका भुगतान किया। किन्तु अक्टूबर 2005 में कोल्ड स्टोरेज का टांसफार्मर चोरी हो गया। जिसे विधुत विभाग ने दूसरा नही रखा और उसका कोल्ड स्टोरेज टांसफार्मर न मिलने के कारण बन्द हो गया। जिसके कारण उसने 12 दिसम्बर 2006 को कनेक्शन को समाप्त करने के लिए अधिशासी अभियंता को कहा। जिस पर कनेक्शन का स्थाई विछेदन करते हुए 13 ,24,050 रु का बिल दे दिया। जिसे लेकर वह विधुत विभाग व आगरा प्रवन्ध निर्देशक के पास गया। किन्तु उसकी सुनवाई नही हुई तो वह उच्च न्यायालय इलाहाबाद गया तो उच्च न्यायालय से तीन लाख रुपया जमा कर कनेक्शन जोड़ने का आदेश दिया। अप्रेल 2007 में तीन लाख जमा करके पुनः कोल्ड स्टोरेज चालू हो गया। उसने कहा कि अब तक वह 1471000 रु अप्रेल 2008 तक जमा कर चुका है। कोई राशि शेष नही है उसकी सिक्योरिटी राशि 75 550 रु भी विधुत विभाग में जमा है। उसने ओ टी एस योजनमे भी 1000 रु जमा करके रजिस्ट्रेशन कराया फिर भी उसे 570422 रु के सर चार्ज की छूट नही दी गई। अब विधुत विभाग 14, 10,255 रुपया की माग कर रहा है, न देने पर जेल भेजने व आर सी भेजने की धमकी दे रहा हैं। जब कि उस पर मात्र 7,65,422 रु बिल हो रहा है। उसका कनेक्शन ग्रामीण क्षेत्र में में उसके आधार पर बिल बनाया जाए और यह बिल निरस्त किया जाये। जिस पर जिला उपभोक्ता न्यायालय ने रुपये न बसूलने के लिए स्टे आदेश दिया था। जिसकी अपील माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद की ओर जिला उपभोक्ता न्यायालय के आदेश को स्टे कर निरस्त कर दिया और कानून के अनुसार कार्यवाही करने की स्वतंत्रता दी थी। आदेश 25 अक्टूबर 2005 को न्यायालय में दाखिल किया था। विधुत विभाग के वरिष्ठ अधिवक्ता देवेन्द्र सिंह कटारिया ने माननीय आयोग को अवगत कराया कि कोल्ड स्टोरेज का कनेक्शन औधोगिक कनेक्शन हैं। जो आयोग की सुनवाई के अंतर्गत नही आता हैं तथा वह उपभोक्ता की श्रेणी में नही आता हैं। कनेक्शन को स्थाई विच्छेदन के बाद जो राशि निकली वह 13, 24,050 रुपया बकाया था। जिस पर वह माननीय उच्च न्यायालय गया। वहां के आदेश पर तीन लाख रुपये आंशिक जमा करके कनेक्शन चालू कराया। किन्तु 13 ,24 ,050 रु का बिल निरस्त नही किया था। ओ टी एस में उसने सिर्फ रजिस्ट्रेशन कराया, बिल बिना सरचार्ज के बताया। किन्तु जमा समय अबधि में नही किया एवं सिक्योरिटी राशि का समायोजन करके ही बिल दिया है। टांसफार्मर के चोरी की कोई सूचना विभाग को नही दी और न ही थाने में एफआईआर कराई। जिस पर विधुत अधिवक्ता के तथ्यों से सहमत होते हुए वादी व उसके अधिवक्ता को 12 अप्रेल 2021 को सूचना दी किन्तु कोई उपस्थित नही हुआ। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष सुभाष चंद्र कुलश्रेष्ठ व सदस्य देवेन्द्र गुप्ता ने तथ्यों के आधार पर पाया कि वादी ने रिट उच्च न्यायालय इलाहाबाद में भी इन्ही बिंदुओं पर दायर की है। वादी के अनुसार 7,65 422 रुपया बाकी हैं। जब कि विधुत विभाग के अनुसार 14,10,255 रुपया बकाया हैं। चूंकि उक्त वाद उच्च न्यायालय में लंबित होने ओर वादी की तरफ से कोई उपस्थित न होने विधुत अधिवक्ता के तथ्यों से सहमत होते हुए 14 ,10, 255 रुपया का बिल निरस्त करने का वाद खारिज किया।